भाजपा फूंक-फूंक कर रखेगी कदम, कांग्रेस पाटीदारों को संभालने की कोशिश करेगी
सूरत। निकाय चुनाव परिणामोंं की खुशी जाहिर करें या शोक इसी असमंजस के बीच हार्दिक एंड कंपनी का क्या करें इस पर भी विचार-विमर्श शुरु हो गया है। शहरी क्षेत्रों मेंं पाटीदारोंं ने भाजपा के प्रति पूरी वफादारी दिखाते हुए महानगरपालिकाओं में पाटीदारोंं से भाजपा को भारी नुकसान होगा इस अनुमान को गलत साबित कर दिया है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों मेंं कांग्रेस की जीत मेंं पाटीदारोंं की भूमिका रही या अन्य कारण, इसकी जांच होगी।
शहरों में भाजपा और गांवों में कांग्रेस इस हिसाब से दोनोंं पार्टियों ने पूरे गुजरात को आधा-आधा बांट लिया है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन पर भाजपा में अब गहन विचार-विमर्श होगा। कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने के लिए शहरी क्षेत्रोंं केपाटीदारों को रिझाने का प्रयास करेगी।
कुछ दिन पहले गुजरात मेंं पाटीदारोंं ने आरक्षण की मांग कर आंदोलन शुरु किया था। गुजरात सरकार ने कानूनी हथकंडा अपनाकर पाटीदारों के आरक्षण की मांग को गलत ठहराते हुए आंदोलन केअग्रणी 22 वर्षीय हार्दिक पटेल और उसके साथियोंं को पकड़कर जेल मेंं डलवा दिया था। सरकार की नींद तो खुली लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पाटीदार आरक्षण की आग गुजरात के कोने-कोने तक पहुंच चुकी थी। निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने चुनाव प्रचार की बागडोर खुद संभाली। निकाय चुनावों मेंं भाजपा को सफलता भी मिली लेकिन अब हार्दिक का क्या करेें यह सवाल भाजपा को सताने लगा है।
हार्दिक को यदि जेल से मुक्त किया जाता है तो ऐसा कहा जाएगा कि सरकार आंदोलनकारियों के आगे झुक गयी। यदि हार्दिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है तो आगामी विधानसभा मेंं बचे-खुचे पाटीदार भी भाजपा से दूर हो जाएंगे। खैर, अब देखना यह है कि हार्दिक का क्या होगा?
शहरों में भाजपा और गांवों में कांग्रेस इस हिसाब से दोनोंं पार्टियों ने पूरे गुजरात को आधा-आधा बांट लिया है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन पर भाजपा में अब गहन विचार-विमर्श होगा। कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने के लिए शहरी क्षेत्रोंं केपाटीदारों को रिझाने का प्रयास करेगी।
कुछ दिन पहले गुजरात मेंं पाटीदारोंं ने आरक्षण की मांग कर आंदोलन शुरु किया था। गुजरात सरकार ने कानूनी हथकंडा अपनाकर पाटीदारों के आरक्षण की मांग को गलत ठहराते हुए आंदोलन केअग्रणी 22 वर्षीय हार्दिक पटेल और उसके साथियोंं को पकड़कर जेल मेंं डलवा दिया था। सरकार की नींद तो खुली लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पाटीदार आरक्षण की आग गुजरात के कोने-कोने तक पहुंच चुकी थी। निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने चुनाव प्रचार की बागडोर खुद संभाली। निकाय चुनावों मेंं भाजपा को सफलता भी मिली लेकिन अब हार्दिक का क्या करेें यह सवाल भाजपा को सताने लगा है।
हार्दिक को यदि जेल से मुक्त किया जाता है तो ऐसा कहा जाएगा कि सरकार आंदोलनकारियों के आगे झुक गयी। यदि हार्दिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है तो आगामी विधानसभा मेंं बचे-खुचे पाटीदार भी भाजपा से दूर हो जाएंगे। खैर, अब देखना यह है कि हार्दिक का क्या होगा?
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