पेरिस. साल भर में चौथे बड़े आतंकी हमले के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बार-बार फ्रांस को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। पेरिस में सात से ज्यादा हमले कर 155 लोगों को मौत के घाट उतारने का जिम्मा आतंकी संगठन आईएसआईएस ने लिया है। इससे पहले भी तीनों हमले आईएसआईएस ने ही किए थे। इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने तीन दिन राष्ट्रीय शोक का एलान करते हुए कहा कि इस हमले के लिए आईएसआईएस जिम्मेदार है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया में कहा- अब हम भी इससे बेदर्दी से निपटेंगे। हमें पता है कि इसके पीछे कौन हैं और वे कहां से आए हैं। अब हम भी इसका जवाब बेरहमी से देंगे। (पेरिस हमले की पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
पोप ने क्या कहा?
पोप ने इस घटना की निंदा की है। वेटिकन सिटी के स्पोक्सपर्सन फॉदर फेडेरिको लोम्बार्डी ने एक स्टेटमेंट में कहा- यह पागलपन आतंकवाद है। हम इसकी निंदा करते हैं। नफरत में हिंसा करने वालों को जवाब दिया जाना चाहिए।
क्यों टारगेट बन रहा है फ्रांस?
पहला कारण
फ्रांस सीरिया और इराक में अमेरिकी फौज का साथ देता रहा है। इसलिए आईएसआईएस उसे निशाना बना रहा है। अमेरिकी अगुआई वाली आर्मी में फ्रांस की फौज भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। फ्रांस सीरिया, इराक ही नहीं, माली और लीबिया में भी अमेरिकी सेना का साथ दे चुका है। फ्रांस ने विदेशों में जिहादियों से लड़ाई के लिए 10 हजार सैनिक भेज रखे हैं। इसमें वेस्टर्न अफ्रीका में 3 हजार, सेंट्रल अफ्रीका में 2 हजार और 3200 सैनिक इराक में तैनात हैं।
फ्रांस सीरिया और इराक में अमेरिकी फौज का साथ देता रहा है। इसलिए आईएसआईएस उसे निशाना बना रहा है। अमेरिकी अगुआई वाली आर्मी में फ्रांस की फौज भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। फ्रांस सीरिया, इराक ही नहीं, माली और लीबिया में भी अमेरिकी सेना का साथ दे चुका है। फ्रांस ने विदेशों में जिहादियों से लड़ाई के लिए 10 हजार सैनिक भेज रखे हैं। इसमें वेस्टर्न अफ्रीका में 3 हजार, सेंट्रल अफ्रीका में 2 हजार और 3200 सैनिक इराक में तैनात हैं।
दूसरा कारण
पूरे यूरोप में फ्रांस में ही सबसे ज्यादा मुस्लिम रहते हैं। ऐसे में, आईएसआईएस यहां अपना स्लिपर सेल आसानी से एक्टिव कर लेता है। यूरोपीय सीमाई देशों से इन्हें आसानी से गन, विस्फोटक और हथियारों की सप्लाई हो जाती है। इस्लामी जिहाद के खिलाफ फ्रांस हमेशा अमेरिका के साथ रहा है।
पूरे यूरोप में फ्रांस में ही सबसे ज्यादा मुस्लिम रहते हैं। ऐसे में, आईएसआईएस यहां अपना स्लिपर सेल आसानी से एक्टिव कर लेता है। यूरोपीय सीमाई देशों से इन्हें आसानी से गन, विस्फोटक और हथियारों की सप्लाई हो जाती है। इस्लामी जिहाद के खिलाफ फ्रांस हमेशा अमेरिका के साथ रहा है।
तीसरा कारण
फ्रांस ने माली में अल कायदा के खिलाफ 2013 में मोर्चा खोला था। यहां उसका मुकाबला अल कायदा के कमजोर पड़ चुके आतंकी ग्रुप इस्लामिक मगरीब से था। पंद्रह दिन पहले ही AQIM के लीडर ने समर्थकों को फ्रांस पर हमले के लिए कहा था।
फ्रांस ने माली में अल कायदा के खिलाफ 2013 में मोर्चा खोला था। यहां उसका मुकाबला अल कायदा के कमजोर पड़ चुके आतंकी ग्रुप इस्लामिक मगरीब से था। पंद्रह दिन पहले ही AQIM के लीडर ने समर्थकों को फ्रांस पर हमले के लिए कहा था।
चौथा कारण
पिछले हफ्ते ही फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने एलान किया था कि इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई के लिए वे इराक के गल्फ इलाकों में एयरक्राफ्ट कैरियर भेजेंगे। (हमले के बाद की फोटोज देखने के लिए यहां क्लिक करें)
पिछले हफ्ते ही फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने एलान किया था कि इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई के लिए वे इराक के गल्फ इलाकों में एयरक्राफ्ट कैरियर भेजेंगे। (हमले के बाद की फोटोज देखने के लिए यहां क्लिक करें)
फ्रांस के राष्ट्रपति ने और क्या कहा?
> हम आतंक के खिलाफ लड़ाई करेंगे। आतंकियों को खत्म करने और फ्रांस को सुरक्षित बनाने के लिए हमारी फोर्स जुटी हुई है। कोई नया आतंकी हमला न हो, इसलिए हम मिलिट्री को भी तैनात कर रहे हैं। सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और आतंकी घटना पर चर्चा के लिए मैंने कैबिनेट मीटिंग बुलाई है।
> दो फैसले लिए जा रहे हैं : पूरे देश में इमरजेंसी लागू की जा रही है। कुछ जगहें पूरी तरह बंद रहेंगी और ट्रैफिक पर भी बैन लग सकता है। पेरिस में अलग-अलग ठिकानों पर आतंकियों की खोज के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।
> मैंने सभी सीमाओं को सील करने का आदेश दिया है। हम चाहते हैं कि हमले की नीयत से कोई भी आतंकी देश में घुस न पाए और जो हमले की साजिश में शामिल थे, वे देश छोड़कर न जा पाएं।
> दो फैसले लिए जा रहे हैं : पूरे देश में इमरजेंसी लागू की जा रही है। कुछ जगहें पूरी तरह बंद रहेंगी और ट्रैफिक पर भी बैन लग सकता है। पेरिस में अलग-अलग ठिकानों पर आतंकियों की खोज के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।
> मैंने सभी सीमाओं को सील करने का आदेश दिया है। हम चाहते हैं कि हमले की नीयत से कोई भी आतंकी देश में घुस न पाए और जो हमले की साजिश में शामिल थे, वे देश छोड़कर न जा पाएं।
> हम जानते हैं कि ये आतंकी कहां से आए थे और ये कौन हैं। इस मुश्किल समय में हमें एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और एकजुटता दिखानी चाहिए। फ्रांस मजबूत है। हमें एकजुट होकर आतंक के खिलाफ आवाज उठानी होगी। (यहां देखें पेरिस हमले के वीडियोज)
No comments:
Post a Comment