नासा का नया डाटा दर्शाता है कि मंगल ग्रह की सतह पर बहता हुआ पानी मौजूद है. तरल पानी की मौजूदगी बताती है कि मंगल ग्रह अभी भी भौगोलिक रूप से सक्रिय है. नई खोज से मंगल ग्रह पर जीवन के होने की संभावना भी बढ़ गई है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर देखी गई ग़हरी लकीरों को अब तरल पानी के सामयिक बहाव से जोड़कर देखा जा सकता है.
नासा के उपग्रहों से मिला डाटा दर्शाता है कि चोटियों पर दिखने वाले ये लक्षण नमक की मौजूदगी से जुड़े हैं.
महत्वपूर्ण बात यह है कि विरल हवा वाले मंगल ग्रह पर ऐसा नमक, पानी के जमने और वाष्प बनने के तापमान को भी बदल सकते हैं जिससे पानी ज़्यादा समय तक बह सकता है.
वैज्ञानिक लुजेंद्र ओझा और उनके सहयोगी शोधकर्ताओं ने नैचुरल जियोसाइंस जनरल में ये खोज प्रकाशित की है.
सोमवार को जारी की गई इस खोज से मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं के बारे में निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं क्योंकि तरल पानी की मौजूदगी इस संभावना को भी जगा देती है कि वहां माइक्रोब्स भी मौजूद हो सकते हैं.
साथ ही सतह के नज़दीक पानी के स्त्रोतों की पहचान से भविष्य में मंगल ग्रह पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी ‘वहां रहना’ आसान हो सकता है.
शोधकर्ता लंबे समय से इस बात के कयास लगाते रहे हैं कि क्या अब भी तरल पानी मंगल की सतह पर बहता होगा या नहीं.
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