Monday, 30 November 2015

शास्त्री और गांगुली ने नागपुर पिच को ठीक बताया

 आलोचना की जगह बल्लेबाजी पर ध्यान दे दक्षिण अप्रâीका
मुम्बई। टीम इंडिया के निदेशक रवि शास्त्री और और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा है कि मेहमान दक्षिण अप्रâीकी टीम को पिच की शिकायतें करने की जगह अपने खेल पर ध्यान देना चाहिये। इनका कहना है कि तीन दिन में टेस्ट समाप्त होने में कोई गलती नहीं है। नागपुर पिच की आलोचना से नाराज शास्त्री ने कहा है कि आलोचकों को शिकायतें करना बंद करना चाहिए। शास्त्री ने कहा कि पिचों में कोई खराब नहीं है। मैं उम्मीद करता हूं कि दिल्ली में भी ऐसी ही पिच मिलेगी। मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है। भारत चार मैचों की श्रृंखला में २-० से आगे है। दूसरा मैच बारिश के कारण नहीं हो पाया। तीसरा मैच तीन दिसंबर से दिल्ली में खेला जाएगा।
गौरतलब है कि यह पूरी श्रृंखला ाqस्पनरों की मददगार पिचों को लेकर विवादों के घेरे में रही। उन्होंने कहा कि पिचों की आलोचना करने वालों को समझना चाहिये कि बल्लेबाज पिचों की वजह से नहीं बाqल्क अपनी तकनीक की खामी के चलते आउट हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे दिखता है कि क्रीज पर लंबे समय तक खड़े रहने की कला खत्म हो रही है। ज्यादा एकदिवसीय क्रिकेट खेलने से ऐसा हुआ है। इस तरह की पिचों पर खेलने से ही पता चलेगा कि क्रीज पर समय बिताना कितना जरूरी है।
शास्त्री ने कहा कि जब आप हाशिम अमला और फाफ डु प्लेसिस को कल बल्लेबाजी करते देख रहे थे तो लगा होगा कि पिच में कोई खराबी नहीं है। इसी तरह की पिचों पर पहले बल्लेबाज शतक बनाते आये हैं क्योंकि वे इसके लिये तैयार रहते थे। उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि नागपुर में पिच में असमान उछाल था। उन्होंने कहा कि कहां असमान उछाल था। ठीक ही था। दूसरे या तीसरे दिन के बाद गेंद धीमी आने लगी। आप मुझे बताई कि कौन सा बल्लेबाज नीचे की ओर जाती गेंद पर आउट हुआ, सिर्पâ दूसरी पारी में मिश्रा या फाफ डु प्लेसिस को छोड़कर। शास्त्री ने विराट कोहली और आर अश्विन के बयान से सहमति जताई कि विदेशी पिचों के बारे में भारत में कभी शिकायत नहीं की जाती।
वहीं पूर्व कप्तान गांगुली ने विदर्भ क्रिकेट संघ स्टेडियम की पिच का समर्थन किया है। गांगुली ने नागपुर की पिच को ‘अनूठा’ बताते हुए कहा है कि बल्लेबाजों को खुद को इस पिच के अनुवूâल ढालना चाहिए था। गांगुली ने कहा कि मेरे ख्याल से बल्लेबाज थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। गेंद घूम रही थी, इसमें तो कोई संदेह नहीं है। ाqस्पन गेंदबाजों के लिए पिच काफी मददगार थी। मेरे खयाल से यह अपने आप में अनूठी पिच थी। भारत में फिर ऐसी पिच नहीं बनेगी।

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