गुरुवार को यरवडा जेल से रिहा हुए फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त ने मीडिया से आग्रह किया है कि अब उनका ज़िक्र 1993 धमाकों से जोड़ते हुए नहीं किया जाना चाहिए.
अवैध हथियार रखने के दोषी पाए गए 56 साल के संजय दत्त मई 2013 से जेल में थे जहां वह 42 महीने रहे. 2007-08 के बीच उन्होंने जेल में 18 महीने बिताए थे. साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के उस आदेश पर मुहर लगाई थी जिसमें उन्हें कुल पांच साल की क़ैद सुनाई गई थी.
मुंबई में संवाददाता सम्मेलन में संजय दत्त ने कहा, "मैं आतंकवादी नहीं हूं और मीडिया से आग्रह करता हूँ कि अब 1993 के धमाकों से मुझे नहीं जोड़ें."
उन्होंने कहा कि वो पिछले रात को सोये नहीं थे, चार दिन से खाना भी नहीं खाया था, यही सोचकर कि परिवार के साथ जुड़ेंगे और फिर कभी जेल नहीं आएंगे.
संजय दत्त ने कहा कि 23 साल से वे जिस आज़ादी के लिए तरस रहे थे वो आज उन्हें मिल गई है. संजय ने कहा, "मुझे पता है कि खुद को ये दिलासा देने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा कि मैं अब आज़ाद हूँ."
उन्होंने कहा कि आज के दिन वो सबसे अधिक अपने पिता सुनील दत्त को 'मिस' कर रहे हैं.
संजय दत्त ने कहा, "यदि मेरे पिता ज़िंदा होते तो शायद सबसे ज़्यादा खुश होते. जब कोर्ट ने कहा था कि मैं आतंकवादी नहीं हूँ, उस वक्त भी मेरे पिता ये सुनने के लिए ज़िंदा नहीं थे. मेरे पिता ही ये सुनने के लिए सबसे ज़्यादा बेताब थे."
यरवडा जेल से बाहर निकलकर ज़मीन को चूमने और तिरंगे को सलाम करने पर उन्होंने कहा, "ये धरती मेरी मां है, मैं हिंदुस्तान की धरती को प्यार करता हूं और मुझे भारतीय होने पर गर्व है, इसीलिए मैंने अपनी सज़ा काटी."
संजय दत्त ने इस मुश्किल समय में साथ निभाने के लिए पत्नी मान्यता की तारीफ़ की. उन्होंने कहा, "वो मेरा बेटर हाफ़ नहीं, बेस्ट हाफ़ हैं...मैंने जो कुछ झेला, मेरी पत्नी ने उससे कहीं अधिक सहा है."
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