Monday, 14 December 2015

तिकोनी 'अड़ान' में फंसा नेपाल

Image copyrightReuters
भूकंप ने नेपाल का संविधान बनवाया. संविधान से मधेसी विरोध फूट पड़ा और नाकेबंदी हुई. अब नाकेबंदी ने नेपाल को आर्थिक रूप से कम से कम 10 साल पीछे ठेल दिया है.
नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली कह रहे हैं कि उनके विकास के सपने चकनाचूर हो चुके हैं. दरअसल नेपाल भूकंप-संविधान-नाकेबंदी के त्रिकोण से बनी अड़ान (गतिरोध) में फंस चुका है. कब निकलेगा ये कोई नहीं जानता.
Image copyrightEPA
हां, यह ज़रूर हुआ है कि इस सिलसिले ने राजनीति की सिलाई उधेड़ दी है जिससे भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद और नेताओं के अहम की टकराहट सब दिखाई देने लगे हैं.
राजधानी काठमांडू में राजनीति के अखाड़चियों के दांव पेंचों के कारण भूकंप के सात महीने बाद भी भूकंप पीड़ितों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है जबकि दुनिया भर से मिला 4.1 अरब डॉलर (यानी लगभग 275 अरब रुपए) का फ़ंड पड़ा सूख रहा है.
Image copyrightbinita dahal
Image captionनाकेबंदी से नेपाल में रोजमर्रा की जीवन पर असर पड़ा है
नाकेबंदी से पैदा हुई ईंधन की क़िल्लत के कारण भूकंप प्रभावित पहाड़ी इलाक़ों में टेंटों में रह रहे लोगों की हालत बदतर हुई है क्योंकि ठंड बढ़ रही है, बर्फ़ गिरने के बाद कई जगहों पर तो पहुंचना भी मुमकिन नहीं रह जाएगा.
याद रहे कि इस साल अप्रैल और मई में आए दो भूकंपों में क़रीब नौ हज़ार लोग मारे गए थे, पांच लाख घर ध्वस्त हुए थे. देश के आधे से अधिक ज़िले भूकंप से प्रभावित हुए थे.
नेपाल में भूकंप से क्षति (फ़ाइल फोटो)Image copyrightprem baniya
पीड़ित परिवारों को अब तक सिर्फ़ 15 हज़ार रुपए की मदद मिली है, हर परिवार को दो लाख देने का वादा किया गया था, लेकिन वह तब मिलेगा जब संसद नेपाल पुनर्निर्माण प्राधिकरण के गठन को मंज़ूरी देगी जिसके पास इस फ़ंड को ख़र्च करने का अधिकार होगा.
इन दिनों संसद चल रही है जिसमें यह बिल पास नहीं हो पा रहा है. पेंच यहां फंसा है कि प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस पुनर्निर्माण प्राधिकरण और मधेसियों की मांग पर लाए गए संविधान संशोधन बिल को एक साथ पास कराना चाहती है.
मधेसी पार्टियों का मोर्चा प्राधिकरण बिल पर तो राज़ी है, लेकिन संविधान संशोधन बिल की अपने हितों के संदर्भ में चीरफाड़ करना चाहता है. सरकार प्राधिकरण को तवज्जो दे रही है और मधेसियों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहती, लेकिन हंगामे के आगे लाचार है. लेकिन असली पेंच कहीं और है जिसे सभी पार्टियों के नेता 'ऑफ़ द रिकार्ड' स्वीकार करते हैं.
रस्साकशी इस बात को लेकर चल रही है कि अरबों के फ़ंड को ख़र्च करने वाले पुनर्निर्माण प्राधिकरण का प्रमुख किस पार्टी का आदमी बनेगा. यही सबसे बड़ी अड़ान है जिसके कारण भूकंप पीड़ितों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है.
Image copyrightepa
इस बीच नेपाल से 35 साल से नीचे के 100 युवाओं का एक दल चीन के बुलावे पर सिचुआन प्रांत के भूकंप पीड़ित कुमिंग और चेंन्डुंग ज़िलों का हाल जानने गया है. इसमें से 83 नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत माओवादी) के नेताओं के रिश्तेदार और 17 बड़े अफ़सरों के बच्चे हैं जिनमें से बहुतेरे नेपाल के भूकंप पीड़ित इलाक़ों के भी नहीं हैं.
इनमें नेकपा (ए-माओवादी) के चेयरमैन पुष्प कमल दहल यानी प्रचंड के नातेदारों के चार बच्चे और इसी पार्टी के गृहमंत्री शक्ति बसनेत की दो बेटियां संगम और बबीता भी शामिल हैं. नेपाली मीडिया द्वारा इसे फ़ैमिली पिकनिक बताकर खिंचाई करने के बाद प्रचंड ने गृहमंत्री को कहा है कि वे पार्टी की छवि ख़राब करने वाले काम न करें. गृहमंत्री बग़लें झांक रहे हैं.
फ़ाइल फोटोImage copyrightEPA
भूकंप की आपदा के कारण ही नेपाल की राजनीतिक पार्टियों में सहमति बनी थी कि जल्दी से संविधान बनाकर राजनीतिक अस्थिरता ख़त्म की जाए ताकि पुनर्निर्माण का काम तेज़ी से व्यवस्थित ढंग से हो सके.
यही वजह थी कि चार साल के लिए बनी संविधान सभा ने दो साल में काम निपटाया लेकिन जो संविधान बना वह मधेसियों को मंज़ूर नहीं था. इसी कारण भारत-नेपाल सीमा की नाकेबंदी और संविधान में संशोधन की नौबत आई.
Image copyrightReuters
पूरे आसार हैं कि संविधान में संशोधन के बाद मधेसियों की कामयाबी से प्रेरित होकर नेपाल के आदिवासी और दूसरे वंचित तबक़े भी सत्ता में हिस्सेदारी और नौकरियों में आरक्षण की मांग करेंगे जिससे अस्थिरता का दौर लंबा चलेगा.

No comments:

Post a Comment