पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने बीबीसी से कहा कि सीरिया में इस्लामिक स्टेट को निशाना बनाने के लिए शुरू की गई ब्रिटेन की कार्रवाई को इराक़ पर हमला करने जैसा नहीं माना जाना चाहिए.
टोनी ब्लेयर ने कहा कि मौजूदा कार्रवाई 2003 के युद्ध से अलग है क्योंकि अभी अरब जगत में पश्चिम के सहयोगी मौजूदा हैं, जो उस वक़्त नहीं थे.
उन्होंने कहा कि इराक़ और लीबिया में संघर्ष के अनुभव से कहा जा सकता है कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ व्यापक लड़ाई के लिए सिर्फ 'तानाशाहों से निपट लेना' काफ़ी नहीं है.
सीरिया में हवाई हमलों के लिए बुधवार को ब्रितानी संसद की अनुमति मिलने के बाद आईएस को निशाना बनाने के लिए ब्रितानी वायुसेना के लड़ाकूओं को तैनात किया गया है.
गुरुवार को टोरनाडो लड़ाकू विमानों ने आईएस के छह ठिकानों पर बम गिराए.
ब्लेयर ने बीबीसी से कहा, "यदि हम सोचें कि भी हम अपने आप को सीरिया से अलग रखते हैं तो हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि इससे हमारे बहुत से हित जुड़े हुए हैं."
उन्होंने कहा कि 13 नवंबर को पेरिस में हुए हमलों से पता चला है कि अगर आईएस को और ताक़त हासिल करने का अवसर दिया गया, तो वो यूरोप और अमरीका और पश्चिमी देशों को अपना निशाना बनाएंगे.
उन्होंने कहा, "9/11 हमले के बाद इस क्षेत्र के बहुत सारे देश सोचते थे कि देखिए यह आपकी समस्या है, आप खुद इसका समाधान निकालो लेकिन अब यह सभी देश चरमपंथ की समस्या से जूझ रहे हैं और उससे लड़ रहे हैं."
"अब सभी देश एक गठबंधन बना रहे हैं. ऐसा अवसर पहले नहीं आया."
ब्लेयर 2003 के इराक़ युद्ध में की गई ग़लती के लिए पहले ही खेद जता चुके हैं. वह मानते हैं कि इस बात में सच्चाई है कि यह युद्ध इस्लामिक स्टेट के उदय की वजह बना.
No comments:
Post a Comment