Wednesday, 16 December 2015

दशक भर बाद बढ़ी अमरीकी ब्याज दर

फ़े़डरल रिज़र्वImage copyrightAFP
उम्मीद के मुताबिक ही अमरीकी फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 0.25 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी करने का फैसला कर लिया है.
इस इज़ाफ़े के बाद ब्याज दर 0.25 से 0.50 फ़ीसदी के बीच आ जाएंगे.
अमरीका के सेंट्रल बैंक ने अगले साल के आर्थिक विकास दर के अनुमानों में भी संशोधन किया है, 2.3 फ़ीसदी से बढ़ा कर इसे 2.4 फ़ीसदी कर दिया गया है.
इसके ज़रिये बैंक ने ये जताने की कोशिश की है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था अब मंदी के दौर से बाहर निकल कर सामान्य स्थिति में पहुंच गई है.
अमरीका के संघीय बैंक का कहना है कि ब्याज दरों के बढ़ने से आर्थिक विकास को नुकसान नहीं पहुंचेगा
इसका असर पूरी दुनिया पर होने के आसार हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा ऐसा कहा जा रहा है.
जाउ जोंसImage copyrightGetty
जानकारों के मुताबिक जो संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाज़ारों में पैसा लगा रहे थे वो वापस अमरीका की ओर मुड़ सकते हैं.
हालांकि तुरंत ऐसा होगा इसकी संभावना कम है.
ब्याज दर बढ़ने के साथ ही शेयर बाज़ारों ने उछाल भरी है, डाउजोंस में 50 अंकों की तेज़ी दर्ज हुई है.
संघीय बैंक के इस कदम से डॉलर के और मजबूत होने की संभावना है.
अमरीका में दिसंबर 2008 से ही ब्याज दर शून्य फ़ीसदी है और पिछली बार ब्याज दर में इज़ाफ़ा जून 2006 में हुआ था. ब्याज दर बढाने का पिछला चक्र जून 2004 में शुरू हुआ था.
जेनेट येलेनImage copyrightGetty
ब्याज दर को बढ़ाने का फ़ैसला सर्वसम्मति से हुआ.
सेंट्रल बैंक ने इसके पीछे अमरीकी लोगों के घरेलू खर्चों में बढ़ोत्तरी, व्यापार में निवेश और महंगाई की लगातार नीची दर को वजह बताया है.
फ़ेडरल रिज़र्व की प्रमुख जेनेट येलेन का कहना है कि कमेटी को यकीन है कि अर्थव्यवस्था का ‘मज़बूत होना जारी’ रहेगा हालांकि अब भी इसमें ‘सुधार की गुंजाइश’ है.
बैंक का कहना है कि वो लगातार महंगाई और रोजगार पर नज़र रखेगा ताकि अगली बढ़ोत्तरी का उचित वक्त तय किया जा सके.
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