छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री अजय चंद्राकर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न मामले की जांच अदालत खुद करेगी.
उनके ख़िलाफ़ पंचायत विभाग की एक बर्खास्त महिला अधिकारी मंजीत कौर बल ने मामला दायर किया है.
मामला उठाने वाली मंजीत कौर बल को न सिर्फ नौकरी से हाथ धोना पड़ा था बल्कि पुलिस में शिकायत के बावजूद मंत्री के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
मंगलवार को रायपुर की एक स्थानीय अदालत ने कहा कि अजय चंद्राकर छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री हैं. उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश देने से जांच को प्रभावित करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता.
पंचायत, ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य, लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा, शिक्षा जैसे कई विभाग संभाल रहे मंत्री अजय चंद्राकर पर आरोप है कि उन्होंने राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में प्रशिक्षण के लिए आईं कुछ महिला अधिकारियों के साथ अपने घर पर बदसलूकी की.
पीड़ित महिलाओं ने इसकी शिकायत राज्य विकास संस्थान में अपनी प्रशिक्षक डॉक्टर मंजीत कौर बल से की जो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाई गई विशाखा कमेटी की अध्यक्ष भी थीं.
इसके बाद मंत्री के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई तो नहीं हुई लेकिन डॉक्टर मंजीत कौर को बर्खास्त किया गया.
बताया जाता है कि मंजीत कौर को निकाले जाने की नोटशीट सीधे मंत्री अजय चंद्राकर ने जारी की थी.
इस मामले को लेकर राज्य भर में धरना-प्रदर्शन हुआ, थाने से लेकर पुलिस महानिदेशक तक शिकायत दर्ज की गई लेकिन मंत्री के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
पिछले महीने मंजीत कौर बल ने इस मामले में अदालत में मंत्री के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया था.
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