मुस्लिमों के बीच पैठ बनाने में जुटा आरएसएस अब अल्पसंख्यक महिलाओं को फैमिली प्लानिंग के फायदे बताएगा। आरएसएस का आनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंचा गुरुवार को राजस्थान के अजमेर में मुस्लिम महिलाओं के लिए ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन करेगा। आरएसएस ने मुस्लिमों और ईसाइयों की ‘बढ़ती संख्या’ पर ‘नियंत्रण’ करने के लिए हाल में केंद्र सरकार से पॉपुलेशन कंट्रोल पॉलिसी में बदलाव करने के लिए कहा था।
अजमेर में आरएसएस के इवेंट का आयोजन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच कर रहा है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सलाहकार इंद्रेश कुमार ने ईटी को बताया कि दो दिनों के इस इवेंट में देशभर से कम से कम 5,000 मुस्लिम महिलाएं हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा, ‘देश में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ने से न केवल सामाजिक तनाव पैदा हो रहा है, बल्कि गरीबी बढ़ी है और देश की ग्रोथ रुक गई है। इससे निरक्षरता, स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और बेरोजगारी बढ़ी है। कुरान में यह स्पष्ट कहा गया है कि एक व्यक्ति को उतने ही बच्चे पैदा करने चाहिए, जिनकी आप अच्छी तरह देखभाल कर सकें। इस सबक का सभी मुस्लिमों को पालन करना चाहिए।’
नवंबर में रांची में तीन दिन की नेशनल एग्जिक्यूटिव के बाद संघ ने नेशनल पॉप्युलेशन पॉलिसी को संसाधनों की उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दोबारा बनाने के लिए कहा था। आरएसएस की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया था कि 1951-2011 के बीच हुई जनगणनाओं में हिंदुओं के धर्मों की जनसंख्या में हिस्सेदारी 88 पर्सेंट से घटकर 83.5 पर्सेंट हुई है, जबकि मुस्लिम जनसंख्या 9.8 पर्सेंट से बढ़कर 14.23 पर्सेंट पर पहुंच गई है।
आरएसएस से संघसरचालक मोहन भागवत ने भी इस वर्ष विजयदशमी के मौके पर नागपुर में इसी विषय पर भाषण दिया था। इंद्रेश कुमार ने कहा कि सेमिनार में आरएसएस के कई नेता और मुस्लिम समुदाय में संघ से सहानुभूति रखने वाले महिलाओं से छोटे परिवारों की जरूरत, मुस्लिम समुदाय में तलाक की बढ़ती संख्या और अन्य विषयों पर बात करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम तलाक पर बहस नहीं करेंगे। यह समुदाय का आंतरिक मामला है।
देश में तलाकशुदा महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और उनमें से बहुत सी मुस्लिम समुदाय से हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? हम महिलाओं को यह भी बताना चाहते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके पति जो पैसा कमा रहे हैं, वह सही तरीके से आए और हराम न हो। वे जो पैसा कमाते हैं, वह अन्य लोगों के खिलाफ अपराध करने से नहीं आना चाहिए। महिलाओं को इसका ध्यान रखना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अजमेर मुस्लिमों के लिए एक पवित्र स्थान है और इसी वजह से इवेंट के लिए उसे चुना गया है।
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