Monday, 21 December 2015

सीएम केजरीवाल सहित 5 लोगों के खिलाफ जेटली ने किया मानहानि का केस

 जेटली ने मानहानि का दावा करते हुए मांगें १० करोड़ रुपये
नई दिल्ली । डीडीजीए में कथित फर्जीवाड़े के आरोप झेल रहे केंद्रीय वित्त मंत्री ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं पर दो केस किए हैं। ‘आप’ नेता अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, कुमार विश्वास, दीपक वाजपेयी, राघव चड्डा और आशुतोष के खिलाफ जेटली ने १० करोड़ रुपए का मानहानि केस दर्ज कराया है। जेटली ने आम नेताओं पर तो कार्रवाई की लेकिन अपनी ही पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद के खिलाफ उन्होंने कोई ऐक्शन नहीं लिया। हालांकि, जेटली के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले आजाद ने इस मुद्दे को भी लपकने में देर नहीं लगाई। डीडीसीए में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले पूर्व क्रिकेट कीर्ति आजाद ने ट्विटर पर जेटली को सीधी सीधे टैग करते हुए पूछा कि मुझ पर मानहानि का केस क्यों नहीं कर रहे हो अरुण जेटली। कीर्ति आजाद ने ट्वीट में कहा कि अरुण जेटली ने मेरा नाम क्यों हटा दिया। आपने तो मेरे लेटर देखे थे, मुझ पर करो ना केस! रजिस्टर्ड पोस्ट से मैंने भेजे थे। आजाद ने इससे पहले एक और ट्वीट किया और लिखा कि ‘प्रिय अरुण जेटली, आप मानहानि का केस दायर कर रहे हो ना? अभिव्यक्ति की आजादी का गल मत घोंटिए’
इन सब बातों और चर्चाओं से एक और सवाल जो हर तरफ कौंध रहा है, वो ये कि डीडीसीए में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा कर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद किस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं? सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अपने सांसद कीर्ति आजाद से नाराज बताई जा रही है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि पार्टी ने कीर्ति आजाद पर संज्ञान लिया है। आजाद ने डीडीसीए में फैले कथित भ्रष्टाचार को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और बिना अरुण जेटली का नाम लिया अध्यक्ष के तौर पर उन पर निशाना साधा था। आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस तब की जब बीजेपी के अहम चेहरे रामलाल और अध्यक्ष अमित शाह उन्हें पहले ही उन्हें ऐसे न करने की हिदायत दे चुके थे। देर शाम आजाद ने डीडीसीए में चल रही धांधली के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने एक सीडी रिलीज करते हुए डीडीसीए में फ्रॉड बिलों की पोल खोली, हालांकि आजाद ने साफ किया कि ये लड़ाई निजी रूप से किसी के खिलाफ नहीं है, लेकिन तमाम इशारे वित्तमंत्री अरुण जेटली पर ही सवाल उठा रहे थे। आजाद ने पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी और पूर्व क्रिकेटर सुरिंदर खन्ना के साथ मिलकर ये प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन सबने सीधे तौर पर तो किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन ये जरूर कहा कि किसी के नाक के नीचे ये भ्रष्टाचार हो और उसे पता ना हो ये कैसे हो सकता है? आजाद २००७ से ही अरुण जेटली पर डीडीसीए में भ्रष्टाचार को लेकर वार करते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जेटली जी के ऊपर आरोप लगाना ईमानदारी पर सवाल उठाने जैसा है। नकवी ने आरोप लगाने वाले लोगों को बेहूदा करार देते हुए कहा कि इन लोगों को राजनीतिक शिष्टाचार भी नहीं मालूम। आजाद से पहले पार्टी के कई नेताओं ने अलग-अलग बयानों से बीजेपी के लिए परेशानी पैदा करने का काम किया है। लेकिन इस तरह से पहली बार हुआ है कि किसी नेता ने पार्टी और सरकार में नंबर-२ नेता के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की हो। कई लोग इसे कई तरह से देख रहे हैं। कुछ ऐसा भी कह रहे हैं कि कीर्ति आजाद के दोनों बेटे दिल्ली के लिए क्रिकेट खेले हैं और जेटली के विरोध के तार इससे भी जुड़े हो सकते हैं। दिल्ली विधानसभा में आजाद की पत्नी पूनम का टिकट काट दिया गया था। राजनीतिक फैसले से आजाद खासे दुखी हुए थे। अब, पार्टी से ऊपर उठकर एक बड़ा कदम उठाने वाले आजाद की राजनीति क्या होगी? और उनके इस कदम का अंजाम किस रूप में सामने आएगा? पार्टी आजाद के ऊपर फिलहाल कार्रवाई कर विरोधियों को मौका नहीं देना चाहेगी। जाहिर सी बात है, ऐक्शन पिछले दरवाजे से ही लिया जाएगा, जिसमें आजाद का राजनीतिक करियर भी दांव पर लग सकता है, लेकिन क्योंकि केंद्र और विधानसभा चुनाव अभी दूर की कौड़ी है, इसलिए सख्त कार्रवाई की त्वरित प्रतिक्रिया भी दिखाई नहीं देने वाली है।
झा/देवेन्द्र/ईए

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