Monday, 23 November 2015

SELF डिफेंस के लिए कराटे सिखाती है चैम्पियन, अब US में बनेगी फिल्म

फाइल फोटो- कोलकाता की कराटे किड आयशा नूर।
फाइल फोटो- कोलकाता की कराटे किड आयशा नूर।

कोलकाता. दुनिया हौसले से ही जीती जाती है। यह साबित किया है कोलकाता की आयशा नूर ने। जब वह 13 साल की थी तब उसके ड्राइवर पिता की मौत हो गई। इसके बाद गरीबी और एपलेप्सी (मिर्गी) की बीमारी ने उसे जकड़ रखा था। कोलकाता के बनिया पुकुर स्थित मुफीदुल इस्लाम गली में अपने 10x12 की टपरे वाली छत के नीचे नई इबारत गढ़ी जा रही है। जिस पर फिल्म बनाने के लिए सेनफ्रांसिस्को के लोग बेचैन हैं। जिसके लिए आयशा समेत दुनिया की 5 लड़कियों को चुना गया है।
सेल्फ डिफेंस के लिए लड़कियों को सिखाती है कराटे
कुछ दुखों के साथ आयशा का सुख है कि वो लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सिखा रही है। उसकी यह क्लास राजा बाज़ार साइंस कॉलेज के सामने लेडीज़ पार्क में लगती है, जहां आसपास की लडकियां आयशा से कराटे सीखती हैं। जल्द ही वो स्कूलों में क्लास लेंगी ताकि कुछ आय भी हो सके। क्योंकि उसे डर है कि कहीं थाईलैंड में मार्शल आर्ट की एडवांस ट्रेनिंग से महरूम न हो जाए। पैसों की कमी के चलते यह खामियाज़ा पहले वो भुगत चुकी है। क्योंकि ममता दीदी से जो आस थी, वो भी हुगली के पानी की तरह अब बहने को विवश है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मदद के संकेत पर आयशा ने कहा था कि उन्हें कोई नौकरी भीख में नहीं चाहिए।
मिर्गी की दवा खरीदने के लिए नहीं थे पैसे
एक रात जब आयशा के मुंह से झाग निकल आया, तो फारूक बुक्का मार दहाड़ने लगा। अम्मी ने बदन छुआ तो उनके भी होश फाख्ता हुए। लेकिन उन्होंने हिम्मत बटोरी। रात एकाध दवा दी। क्योंकि 2500 रुपए नहीं हो सक रहे थे कि पूरी दवा खरीद पाती। सुबह तक उसे तीन दौरे आए। लेकिन आयशा ने साहस बटोरा और दो माह बाद उसी पहली फुर्ती लिए प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। 2011 में नेशनल चैम्पियन का खिताब हासिल कर लिया। लेकिन कोच एम अली की शाबासी और महज़ दाल-भात के बल पर दो घंटे रोज़ प्रैक्टिस। टूर्नामेंट के समय 4 घंटे। सुबह योग, जॉगिंग। मणिमाला हलदार सिखाती हैं वज्रासन, हलासन और प्राणायाम। जीत का कारवां चल पड़ा। अगले साल 2012 में भी नेशनल चैम्पियन पर क़ब्ज़ा। उसके बाद तो 2015 तक निरंतर विदेशों में हिन्दुस्तान का परचम आयशा के पंच का सबब बना।
गोल्ड जीतकर लौटी तो पापा ने घुमाया था ट्रैक्सी में
लेडीज पुलिस को कराटे ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव सरकार को दिया था। आश्वासन मिलने के बाद यह फाइल भी दूसरी फाइलों की तरह कहीं दब गई है। उसकी रोज़ की प्रैक्टिस बताती है, जनवरी में थाईलैंड जाएगी ज़रूर। 14 साल की उम्र में फ़रवरी 2010 में मुंबई से दो गोल्ड मेडल जीत कर लौटी थी। पापा ने पूरा कोलकाता अपनी टैक्सी में घुमाया था। हार्ट अटैक में पापा ने अलविदा कह दिया। उसकी पढ़ाई छूट गई। बड़ा भाई किसी दुकान की चाकरी करने लगा। बहन आस-पास के बच्चों को ट्यूशन। अम्मी शकीला मोहल्ले की महिलाओं के कपड़े सिलने लगी। इतने परिश्रम के बाद दो जून की रोटी तो किसी तरह मिलने लगी, लेकिन दवा के नहीं मिलने पर आयशा को दौरे पड़ने शुरू हो गए।

No comments:

Post a Comment