Thursday, 26 November 2015

अमरीकी टर्कियों का भी ओबामा से भरोसा उठा!

अमरीका में थैंक्सगिविंग डे का उत्सवImage copyrightAP
अमरीका में मौसम तो इन दिनों शुक्रगुज़ार होने का है, माफ़ करने का है, गले लगाने का है यानी थैंक्सगिविंग का. लेकिन माहौल ब्लेमगिविंग, एक दूसरे पर उंगलियां उठाने, आंखें दिखाने और तू-तू मैं-मैं का बना हुआ है.
हर साल की तरह ओबामाजी ने दो मोटी-ताज़ी टर्कियों के सर पर हाथ रखकर उनकी जान बख़्श दी है, फ़ोटो खिंचवा ली और अपना फ़र्ज़ पूरा कर दिया है.
लेकिन इसके बावजूद दोनों टर्कियां मुझे कुछ सहमी-सहमी सी ही लग रही हैं, क्योंकि टीवी पर चल रही बहस सुन-सुनकर उन्हें भी शायद लगने लगा होगा कि ओबामा तो उनकी हिफ़ाज़त करने से रहे. कोई बड़ी बात नहीं कि वो भी हड़ताल कर दें कि उनके सर पर पुतिन या रिपब्लिकन उम्मीदवारों का हाथ रखा जाए.
अमरीका में थैंक्सगिविंग डे का उत्सवImage copyrightAP
मैं जिस वक़्त यह लिख रहा हूं, लाखों अमरीकी परिवार डाइनिंग टेबल के इर्द-गिर्द बैठ चुके हैं, धारदार अमरीकी चाकू से काजू-बादाम से ठुंसी हुई टर्की को बड़े करीने से काट-काटकर प्लेटों में रखा जा रहा है, रेड वाइन सुरकी जा रही है, ऊपरवाले का शुक्रिया भी अदा किया जा रहा है कि इतना बढ़िया खाना उन्हें नसीब हो रहा है.
लेकिन जब पेट भरेगा तो खाने की टेबल पर बहस शुरू होगी और अमरीका का दबा हुआ ग़ुस्सा डकार बनकर बाहर आएगा. अंदाज़ा है कि इस बार बहस की मेन्यू पर सबसे ऊपर इस्लामिक स्टेट, आतंकवाद, मुसलमान, सीरिया से जान बचाकर भाग रहे शरणार्थी और इन मामलों पर कुछ हद तक ऊंघते हुए नज़र आने वाले ओबामा भी होंगे.
थैंक्सिगिवंग डे की शॉपिंगImage copyrightAP
बहस में थोड़ा बहुत ज़िक्र शायद काले-गोरे और नस्लवाद का भी हो. लेकिन अर्थव्यवस्था, शिक्षा पर आसमान छूता खर्च, आईफ़ोन के नए मॉडल, कारदाशियां परिवार, ब्लैक फ़्राइडे की सबसे बढ़िया सेल, घरों की बढ़ती क़ीमत, नई डेटिंग साइट, मिशेल ओबामा के कपड़े, बिल क्लिंटन के लफड़े, इन सब पर "मुस्लिम्स, रैडिकल इस्लाम, लोन वुल्फ़ अटैक" भारी पड़ेंगे.
एक कहेगा आइसिस बुश की वजह से पैदा हुआ, दूसरा उसके लिए ओबामा को ज़िम्मेदार ठहराएगा. ग्यारह सितंबर के हमले के बाद जब ट्विन टावर्स गिरे तो न्यूजर्सी के मुसलमानों ने तालियां बजाईं या नहीं, चौदह साल बाद एक बार फिर से इस पर बहस होगी.
बराक ओबामा, अमरीकी राष्ट्रपतिImage copyrightAFP
रिपब्लिकन उम्मीदवारी की रेस में सबसे आगे चल रहे डॉनल्ड ट्रंप ताल ठोक कर कह रहे हैं कि उन्होंने टीवी पर मुसलमानों को ताली बजाते देखा था. कुछ दूसरे उम्मीदवार भी कहने लग गए हैं कि उन्होंने भी कुछ ऐसा देखा था. शामत बेचारे टीवी चैनलों की आई हुई है क्योंकि उन्होंने न तो कोई ऐसा वीडियो देखा है न दिखाया है.
बहस में एक धड़ा ट्रंप साहब के बयान के साथ होगा, दूसरा न चाहते हुए भी उनकी रेटिंग देखते हुए उनकी बातों में हां में हां मिलाएगा, तीसरा उनके ख़िलाफ़ होने की कोशिश करेगा. बाहर ठंड बढ़ रही होगी लेकिन अंदर वाइन की गर्मी चढ़ रही होगी.
डोनाल्ड ट्रंप, अमरीकी राष्ट्रपति की उम्मीदवारी की दौड़ मेंImage copyrightGetty
अंदाज़ा यह भी है कि हवाई जहाज़ की महंगी-महंगी टिकटें ख़रीदकर, घर की अच्छी भली गर्म रजाई छोड़कर, एयरपोर्ट पर भारी सिक्योरिटी झेलकर, महीनों से इसी मौक़े के लिए पाली जा रही टर्कियों को हलाल कर एक जगह जुटे भाई-बहन, मां-बाप, दादा-दादी, बीवी-बच्चे इस थैंक्सगिविंग पर इतनी तीखी बहस करेंगे कि उससे पैदा हुआ ग़ुस्सा शायद क्रिसमस तक भी ठंडा न हो.
ओबामा ने कहा है कि उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि थैंक्सगिविंग पर आइसिस अमरीका के अंदर हमला करने वाला है. लेकिन अमरीकी ड्राइंग रूम और डाइनिंग रूम के अंदर तो उसकी मार पड़ चुकी है.

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