Monday, 30 November 2015

हार से हताश नहीं ओवैसी

पटना। आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलिमीन के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी बिहार विधानसभा चुनाव की पराजय से हताश नहीं हैं बाqल्क ऊनी महत्वाकांक्षा युवा मुाqस्लमों का सर्वमान्य नेता बनने की है जिसकी पूर्ती के लिए वे हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं। भोपाल में उनका पोस्टर फाड़ने पर पैâला तनाव इस बात का प्रतीक है कि मुाqस्लमों के वोट बैंक पर अब किसी एक दल की दाल नहीं गाल सकती। आ़जम खान के गृह जनपद में जब ओवैसी ने एंट्री मारी थी उस वक्त आ़जम खान बौखला गए थे। यूपी में ओवैसी यदि युवा मुसलमानों के वोट कबाड़ लेते हैं तो समाजवादी पार्टी को भयानक नुक्सान हो जायेगा। इसीलिये बिहार चुनाव के बाद ओवैसी ज्यादा सक्रिय हो गए हैं।
असदुद्दीन ओवैसी यूं तो हैदराबाद की राजनीति की पहचान रहे है लेकिन इन दिनों देश की राजनीति में भी उनके नाम की चर्चा है ओवैसी और उनकी पार्टी के बुलंद होते इरादों से जहां क्षेत्रीय दल चौकन्ना हो गए है बिहार से लेकर पाqश्चम बंगाल तक, उत्तर प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक ओवैसी अपनी पार्टी एमआईएम को विस्तार देना चाहते हैं और इसीलिए अब विरोधी भी उन पर प्रहार कर रहे हैं।
एमआईएम यानी ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलेमीन के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी अपनी पार्टी के इकलौते सांसद हैं। पिछले दस सालों से ओवैसी हैदराबाद से चुनाव जीत कर लोकसभा में पहुंचते रहे हैं। इससे पहले उनके पिता सलाउद्दीन ओवैसी भी हैदराबाद से लगातार छह बार सांसद रह चुके हैं यही वजह है कि हैदराबाद की राजनीति में एमआईएम का दबदबा लंबे वक्त से कायम है लेकिन अब असदउद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी एमआईएम ने हैदराबाद से बाहर दूसरे राज्यों की राजनीति में भी अपने पैर पैâला दिए है।

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