Wednesday, 4 November 2015

ओवैसी को अकेले हिंदू उम्‍मीदवार से बड़ी उम्‍मीदें

35 साल के अमित पासवान संस्कृत में पीएचडी हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं। सीमांचल के अररिया जिले के रानीगंज से चुनाव लड़ रहे अमित पासवान की पहचान सिर्फ इतनी भर नहीं है।
मुस्लिमों के बीच तेजी से पकड़ बना रही हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम ने बिहार में जिन छह उम्‍मीदवारों को मैदान में उतारा है उनमें से वह इकलौते हिंदू उम्‍मीदवार हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार संस्कृत के छात्र से लेकर कट्टर मुस्लिम राजनीतिक दल उम्‍मीदवार बनने तक पासवान ने एक लंबा सफर तय किया है। हालांकि वह दावा करते हैं कि वह बिहार में एमआईएम के पहले हिंदू विधायक होंगे।
पासवान ने बताया कि कैसे वह एक कट्टर मुस्लिम राजनीतिक दल से चुनाव लड़कर भी हिंदू वोटरों को अपने पक्ष में कर सकते हैं।
यह पूछने पर कि आप संस्कृत के एक शोध छात्र रहे हैं ऐसे में कैसे आपने एक मुस्लिम पार्टी से चुनाव लड़ने की ठानी। इस पर सवाल के जवाब में वो सवाल करते हैं कि क्या संस्कृत हिंदू और मुस्लिम के बीच में फर्क करना सिखाती है। वो दावा करते हैं कि एमआईएम केवल एक मुस्लिम पार्टी नहीं है।
बल्कि कोई पार्टी हिंदू और मुस्लिम नहीं हो सकती। एमआईएम के काफी नेता हैदराबाद में हिंदू हैं। मैं बिहार में उनका इकलौता‌ हिंदू उम्‍मीदवार हूं। एमआईएम निचले स्तर के दलितों के हक की आवाज बुलंद करती है मुझे इसकी यह खासियत पसंद आई।
हालांकि अपने नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को एंटी हिंदू होने की बात पर वो कहते हैं मैंने उनका कोई ऐसा बयान नहीं सुना है। न ही मैं उन्हें एंटी हिंदू मानता हूं। वह एक मुखर वक्ता हैं इसलिए लोग उन पर ऐसे आरोप लगाते रहते हैं।
एमआईएम नेता असदुद्दीन के सीमांचल इलाके में वोटों के ध्रुवीकरण कराने की बात पर पासवान कहते हैं ‌कि ओवैसी गरीब और दलित लोगों का ध्रुवीकरण करना चाहते हैं वोटों का नहीं।
21वीं सदी में दलित आज भी कई गांवों में ब्राहमणों के बीच में कुर्सी पर नहीं बैठ सकते। सरकारी दफ्तरों में भी दलितों और मुस्लिमों के प्रति दोहरा रवैया अपनाया जाता है। यही वह समय है जब हम दलितों और मुस्लिमों के अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं।

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