Wednesday, 27 January 2016

'सेक्युलर' शिवराज बचा पाएंगे सांप्रदायिक तनाव से?

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश को 'शांति का टापू' कहते हैं. उनकी छवि भी सेक्युलर है. इसके बावजूद राज्य में पिछले कुछ समय से सांप्रदायिक सद्भाव तेज़ी से बिगड़ रहा है.
इसका सबसे अच्छा उदहारण है धार. यहां के एक धर्मस्थल को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया मस्जिद मानता है. लेकिन स्थानीय लोग इसे भोजशाला कहते हैं.
लंबे समय से स्थानीय लोग यहां वसंत पंचमी उत्सव मनाते हैं. इसे लेकर कई साल से यहां हिंदू-मुसलमानों के बीच तनाव रहता है. दक्षिणपंथी हिंदू संगठन इसे सरस्वती मंदिर बताकर वहां नमाज़ बंद करवाना चाहते हैं.
हर साल यहां वसंत पंचमी के आसपास तनाव बढ़ जाता है. 2013 में तनाव के बीच शिवराज सिंह ने पुलिस वालों से कहा था, ''जो पत्थर फेंके उसे गोली मार दो.'' यह बात उन्होंने दंगाइयों के लिए कही थी.
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इस साल फिर वसंत पंचमी आने वाली है. तनाव बढ़ रहा है लेकिन शिवराज का ऐसा बयान नहीं आया है. वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, ''भाजपा के तमाम मुख्यमंत्रियों में शिवराज सिंह की छवि एक सेक्युलर आदमी की है. उन्हें मुसलामानों की टोपी से गुरेज़ नहीं. पर अब उनकी वह ताक़त नहीं रही.''
रशीद के मुताबिक़ दूसरी तरफ़ संघ परिवार के घटक या पुलिस और प्रशासन सबको लगता है कि उनका सूरज डूब रहा है. यही प्रदेश में रिफ़्लेक्ट हो रहा है.
हरदा की घटना इसका उदहारण है. हाल ही में हरदा के खिरकिया स्टेशन पर ट्रेन में बीफ़ होने के शक में एक मुस्लिम दंपत्ति की पिटाई की गई थी. इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया था.
गिरफ़्तारी के बाद गोरक्षा कमांडो समिति के नेता सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ. जिसमें वह न सिर्फ़ हरदा के एसपी प्रेमबाबू शर्मा पर हिंदुओं के ख़िलाफ़ ग़लत कार्रवाई का आरोप लगा रहे है बल्कि धमका भी रहे हैं कि खिरकिया में 2013 की तरह फिर से दंगे हो सकते हैं.
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राजपुरोहित कहते हैं, ''जो भी किया जा रहा है वो गोरक्षा के लिए किया जा रहा है. खुलेआम गोमांस बेचा जा रहा है. पुलिस कुछ भी नहीं कर रही है.''
हरदा के खिरकिया में सितंबर 2013 में एक बछड़े को मारने की अफ़वाह पर क़रीब 70 मुसलमानों के घरों और दुकानों में आग लगा दी गई थी. हालांकि बछड़े की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसकी मौत पॉलिथीन खाने से हुई थी.
इसके अभियुक्त राजपुरोहित थे, जो तब फ़रार हो गए थे. उन्हें 2014 में राजस्थान के बाड़मेर से गिरफ़्तार किया गया था. उन पर 11 मामले दर्ज हैं. वह अभी ज़मानत पर हैं.
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देवास ज़िले में पिछले हफ़्ते एक व्यक्ति की मौत के बाद कर्फ़्यू लगाना पड़ा. मामले की शुरुआत एक पुराने विवाद को लेकर हुई थी, जो बाद में दो समुदायों का मामला बन गया.
जिस समय देवास में हिंसा हो रही थी, उसी समय सिवनी के बरघाट में ज़मानत पर छूटे तीन व्यक्ति जुलूस की शक्ल में अपने गांव लौट रहे थे. तभी दूसरे पक्ष ने उन पर हमला बोला जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई. इस तरह यह पूरा मामला दो समुदायों के विवाद में बदल गया.
वहीं, धार ज़िले के मनावर क़स्बे में पिछले हफ़्ते विश्व हिंदू परिषद की शौर्य यात्रा में हिंसा भड़की थी. एक समुदाय विशेष की दुकानों में आग लगा दी गई. दोनों समुदाय के लोगों ने एक दूसरे पर पथराव किया.
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वैसे मध्य प्रदेश का मालवा और निमाड़ इलाक़ा हमेशा से संवेदनशील माना जाता रहा है. यहां छोटी-छोटी बातों में तनाव होता रहा है, लेकिन दूसरे क्षेत्र भी अछूते नहीं. कुछ महीने पहले ग्वालियर में भी साप्रंदायिक घटना हुई थी, तो बीते साल अक्तूबर में खरगोन में कर्फ़्यू लगाने की नौबत आ गई थी.
मुख्य विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा कर रही है ताकि आरएसएस का एजेंडा आगे बढ़ाया जा सके.
कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव कहते हैं, ''हाल के चुनाव में भाजपा को जो हार मिली है उससे परेशान होकर अब कोशिश की जा रही है कि माहौल बिगाड़ा जाए और लोगों के मन में डर पैदा किया जाए.''
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वहीं शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि किसी भी सूरत में हालत नहीं बिगड़ने दिए जाएंगे. उन्होंने कहा, ''मध्य प्रदेश हमेशा से शांति का टापू रहा है और रहेगा. किसी को भी प्रदेश के हालात बिगाड़ने की छूट नहीं दी जाएगी. अधिकारियों को निर्देश हैं, जो भी माहौल बिगाड़ने की कोशिश करे, उसके ख़िलाफ सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाए.'

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