Friday, 11 December 2015

भारत को कर्ज़दार बना देगी 'बुलेट ट्रेन'?

मोदी, अबेImage copyrightAP
शुक्रवार से शुरू हुई जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देश हाईस्पीड रेलवे (एचएसआर) पर क़रार करने जा रहे हैं, जिसे आमतौर पर बुलेट ट्रेन कहा जाता है.
निक्की बिज़नेस डेली के अनुसार इस यात्रा में दोनों देश 980 अरब रुपए लागत की रेल परियोजनाओं पर सहमति का ऐलान करेंगे.
बुलेट ट्रेन शुरू करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख चुनावी वायदा रहा है.
पहली एचएसआर मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी और 505 किलोमीटर की दूरी को सात घंटे के बदले दो घंटे में पूरा करेगी. जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) और भारत के रेल मंत्रालय ने दो साल पहले ही हाईस्पीड रेल बनाने और चलाने संबंधी पहलुओं का अध्ययन शुरू किया था.
जापान, बुलेट ट्रेनImage copyrightAFP
जुलाई 2015 में भारत को सौंपी गई इसकी अंतिम रिपोर्ट में जापान की बुलेट ट्रेनों, शिंकान्सेन, की तर्ज पर ट्रेन चलाने की सिफ़ारिश की गई थी.
दरअसल जापान पहला देश था, जिसने हाईस्पीड ट्रेनों के लिए विशेष रेलवे लाइन (शिन्कान्सेन, जिसका शाब्दिक अर्थ नई ट्रंक लाइनें हैं) बनाई थीं.
पहली 515 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन 1964 में टोक्यो और शिन ओसाका के बीच शुरू हुई थी, कुछ-कुछ प्रस्तावित मुंबई और अहमदाबाद कॉरिडोर की तरह. सबसे तेज़ ट्रेन 285 किमी/घंटा की रफ़्तार से टोक्यो और शिन ओसाका की दूरी तय करने में 2 घंटे 22 मिनट लेती है.
जापान यह तकनीक कई देशों को बेचने की कोशिश कर रहा है पर हाल ही में उसने इंडोनेशिया में चीन के हाथों मात खाई है. अब तक जापान ने अपनी बुलेट ट्रेन तकनीक सफलतापूर्वक ताईवान को बेची है और अगर भारत इसे लेने का फ़ैसला करता है तो वह ऐसा दूसरा देश हो जाएगा.
बुलेट ट्रेन ग्राफ़िक्स
जुलाई 2015 में जेआईसीए की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन 350 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चल सकती है.
जेआईसीए की सिफ़ारिशों में 1435 मिमी चौड़ा रेल ट्रैक बनाने का भी प्रस्ताव है जो एचएसआर ट्रेनों के लिए वैश्विक मानक है और जिसे स्टैंडर्ड गेज कहा जाता है.
इसे अब मेट्रो ट्रेनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है (भारतीय रेलवे की ट्रेनें ब्रॉड गेज पर चलती हैं जिसका 1676 मिमी का ट्रैक थोड़ा चौड़ा होता है).
जेआईसीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 किमी/घंटा से अधिक रफ़्तार से चलने वाली हाई स्पीड ट्रेनें दुनिया भर में स्टैंडर्ड गेज पर चलती हैं.
इसकी अनुमानित लागत 98,805 करोड़ रुपए है, जिसमें 2017 से 2023 के बीच सात साल के निर्माण काल के दौरान मूल्य और ब्याज वृद्धि भी शामिल है. इस दौरान जापान रेलों, ट्रेनों और संचालन प्रणाली तक सभी तरह के उपकरण उपलब्ध करवाएगा.
बुलेट ट्रेन ग्राफ़िक्स
इसमें एक ओर का संभावित किराया करीब 2800 रुपए होगा. मुंबई-अहमदाबाद के बीच फ़िलहाल सर्वाधिक भाड़ा मुंबई शताब्दी एक्सप्रेस प्रथम श्रेणी का 1920 रुपए और हवाई किराया क़रीब 1720 रुपए प्रति व्यक्ति है. इसमें हवाई यात्रा से मात्र 70 मिनट लगते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई-अहमदाबाद रूट में 318 किलोमीटर के पुश्ते, 162 किमी पुल और 27.01 किलोमीटर की 11 सुरंगें बनाना भी शामिल होगा. इस लाइन में कुल 12 स्टेशन होंगे जिनमें सूरत और वडोदरा में दो-दो मिनट का ठहराव होगा.
सिफ़ारिशों में कहा गया है कि योजना, डिज़ाइन और बोली की प्रक्रिया 2017 तक पूरा कर लिया जाएगा और बुलेट ट्रेन का व्यावसायिक संचालन 2024 से शुरू हो जाएगा.
भारतीय मैट्रोImage copyrightRavi Shankar Kumar
पहली चीज़ जिस पर ध्यान जाता है वह है लागत- 98,805 करोड़ रुपए का क़र्ज़. निक्की बिज़नेस डेली ने जापान के विदेशमंत्री के हवाले से लिखा है कि भारत 2013 तक जापानी सरकार के समर्थन वाले क़र्ज़ पाने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है.
ये क़र्ज़ कुल मिलाकार 4.45 ट्रिलियन येन का होगा. यह रेलवे क़र्ज़ समझौता भारत को इंडोनेशिया से भी बड़ा क़र्ज़दार बना सकता है.
सवाल यह है कि हम इसे चुकाएंगे कैसे? क्या बुलेट ट्रेन को इतने नियमित ग्राहक मिल पाएंगे? क्या यह भारतीय रेलवे पर हमेशा के लिए बोझ नहीं बन जाएगा?
बहरहाल इसके कुछ स्पष्टीकरण इस प्रकार हैं. पहला तो ये ऋण भारतीय रेलवे के वर्तमान वित्त से अलग रहेगा.
जेआईसीए की व्यावहारिक रिपोर्ट में ब्याज दरों और सात साल की निर्माण लागत का ख़्याल रखा गया है. इसमें कहा गया है अच्छी ख़ासी मात्रा में आय रीयल एस्टेट से आएगी जैसा अन्य देशों में किया गया है.
बुलेट ट्रेन ग्राफ़िक्स
इसका अर्थ यह कि स्टेशन और टर्मिनल अपनी जगह का व्यावसायिक इस्तेमाल करेंगे क्योंकि उनकी कीमतें बढ़ेंगी. जैसे-जैसे संचालन प्रक्रिया रफ़्तार पकड़ेगी, वह स्थायित्व हासिल करेंगे और उनके सफ़ेद हाथी बनने की आशंकाएं कम होंगीं.
रेलवे मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा जेआईसीए की रिपोर्ट में यह भी अनुमान है कि 2023 तक करीब 40,000 यात्री रोज़ इस सुविधा का लाभ उठाएंगे.

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