दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि उनके दफ़्तर पर मंगलवार को सीबीआई ने छापा मारा.
सीबीआई ने केजरीवाल के इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि छापा मुख्यमंत्री के दफ़्तर पर नहीं बल्कि उनके प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के ऑफ़िस पर डाला गया है.
जहां एक तरफ़ आम आदमी पार्टी और भाजपा एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ़ इस घटना के बाद राजनीति गरमा गई है और कई दलों ने इसकी कड़ी निंदा की है.
तृणमूल कांग्रसे ने राज्य सभा में ये मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा में कहा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई छापा आधुनिक भारत के इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना है. यह एक अघोषित इमरजेंसी है."
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केजरीवाल का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, ''एक मुख्यमंत्री का दफ़्तर सील करना अभूतपूर्व है. मैं चकित हूं.''
जनता दल-यू के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि अगर मामला प्रधान सचिव के भ्रष्टाचार का था तो छापेमारी से पहले सीबीआई को मुख्यमंत्री को विश्वास में लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का दफ़्तर सील करना बिल्कुल ग़ैर-वाजिब बात है.
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने थोड़ी सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''ऐसा नहीं कि सीबीआई को छापेमारी का अधिकार नहीं लेकिन ऐसा करने का एक तरीक़ा होता है.''
लेकिन शिवसेना ने इस मामले में बीजेपी और मोदी का समर्थन किया है.
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, "सीबीआई के ग़लत इस्तेमाल के आरोप सभी पार्टियों पर लगे हैं. लेकिन सीएम केजरीवाल को धैर्य रखना चाहिए. देश के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अपशब्द इस्तेमाल करना ठीक नहीं है."
सीबीआई छापे के बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया था, ''मोदी कायर और मनोरोगी हैं.'
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