अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में मुसलमानों की हिमायत में एक रैली निकाली गई.
इसमें राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में शामिल मशहूर व्यवसायी डॉनल्ड ट्रंप के मुस्लिम विरोधी बयानों की निंदा की गई.
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार ट्रंप ने कहा था कि अमरीका में चरमपंथी हमले रोकने के लिए मुसलमानों के अमरीका में प्रवेश पर रोक लगाना ज़रूरी है.
न्यूयॉर्क के धनी व्यवसायी डॉनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद अमरीका में मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है.
ट्रंप के अपने शहर न्यूयॉर्क में भी उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
इस सिलसिले में बुधवार को न्यूयॉर्क के सिटी हॉल के बाहर शहर काउंसिल की स्पीकर मलिसा मार्क-वेवरितो की अगुआई में कई धर्मगुरु और नेताओं समेत क़रीब 200 लोग ट्रंप का विरोध करने पहुंचे.
मलिसा-मार्क वेवेरितो ने कहा, ''डॉनल्ड ट्रंप मुसलमानों के अमरीका प्रवेश पर जिस प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं, वह नस्ल आधारित भेदभाव है. इस्लाम के प्रति नफ़रत है. उनके भय फैलाने वाले बयान से नफ़रत फैल रही है. हम मुसलमानों और सारे न्यूयॉर्कवासियों को यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि लोगों को परेशान करने और नस्लभेदी हमलों की इस सुंदर शहर में जगह नहीं है."
सिटी स्पीकर ने यह भी कहा, ''डॉनल्ड ट्रंप अमरीका के राष्ट्रपति बनने के लायक नहीं हैं.''
प्रदर्शन में शामिल एक यहूदी अमरीकी अलेक्सैंडर रैपापोर्ट का कहना था कि मुसलमानों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाना ग़लत है.
रैपापोर्ट कहते हैं, "मेरी भी बड़ी-बड़ी दाढ़ी है और जो दाढ़ी रखे क्या वह मुसलमान हो जाता है? मैं भी मुसलमान हूँ. कोई यह कैसे तय कर सकता है कि व्यक्ति को धर्म के आधार पर निशाना बनाया जाए. ज़ाहिर है कि यह सब सिर्फ़ नफ़रत पर आधारित है."
उधर व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना की है लेकिन ट्रंप ने अपना बयान वापस नहीं लिया है.
उनका मानना है कि अमरीकियों की सुरक्षा अहम मुद्दा है और उनके बयान का मक़सद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं है.
वैसे रिपब्लिकन पार्टी में 65 प्रतिशत लोग ट्रंप के समर्थन में हैं.
अमरीका में केलीफ़ोर्निया के सैन बर्नारडिनो में हमले के बाद से लोगों में खौफ़ और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. फिर भी कई न्यूयॉर्कवासी मुसलमानों को साथ लेकर चरमपंथियों से मुक़ाबले की बात करते हैं.
ईवा अपनी दोस्त के साथ इस रैली में शामिल हुईं.
ईवा कहती हैं, "हम किसी भी प्रकार के नस्लभेद के खिलाफ़ हैं. मैं 11 सितंबर के हमलों के समय भी यहीं थी और तब भी हमने नफ़रत नहीं फैलने दी थी और एकजुट होकर बुरे समय का सामना किया था. पूरे देश को उससे सीखना चाहिए."
हालांकि अमरीका में रह रहे मुसलमानों में भी हमलों के बाद निशाना बनाए जाने का डर बढ़ा है.
न्यूयॉर्क की एक मुस्लिम महिला रोबीना नियाज़ कहती हैं, "बेइंतिहा खौफ़ है मुसलमानों में. कुछ पता नहीं क्या होगा. इस समय कोई मुसलमान ऐसा नहीं होगा जो सुबह उठकर यह नहीं सोचता हो कि आज उसका दिन ख़ैरियत से गुज़र जाएगा या नहीं."
केलीफ़ोर्निया में पिछले दिनों एक मुस्लिम दंपत्ति सैयद रिज़वान फारूक और तशफ़ीन मलिक ने गोलीबारी करके 14 लोगों को मार डाला था.
No comments:
Post a Comment