Sunday, 20 December 2015

भारतीय रेल का कायाकल्प करेगा जापान

नई दिल्ली। हाल ही में भारत ने जापान के साथ ऐतिहासिक रेल करार किया है। इसमें जापान न सिर्पâ हाईस्पीड ट्रेन चलाएगा बल्कि जापान संपूर्ण भारतीय रेल नेटवर्वâ का कायाकल्प भी करेगा। इसके तहत ट्रेनों की स्पीड बढ़ने के साथ-साथ ट्रैक, रोिंलग स्टॉक व स्टेशनों समेत तमाम चीजों का भी आधुनिकीकरण होगा। इस तरह यह समझौता भारतीय रेल के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने वाला है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जापान के प्रधानमंत्री िंशजो एबी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पिछले दिनों राजधानी में हुआ समझौता त्रिस्तरीय है। मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड ट्रेन इसका महज एक हिस्सा है। बाकी दो हिस्से संपूर्ण भारतीय रेलवे के पुनरुद्धार से संबंधित हैं। इनमें एक का संबंध रेलवे विकास व मानक संगठन (आरडीएसओ) तथा जापानी रेलवे टोqक्नकल रिसर्च इंस्टीटयूट (आरटीआरआइ) के बीच सहयोग से, जबकि दूसरे का सिविल स्ट्रक्चर व रेल नेटवर्वâ के आधुनिकीकरण से है। आरडीएसओ व आरटीआरआइ के मध्य सहयोग से भारतीय रेलवे में अनुसंधान संबंधी गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
जबकि सिविल स्ट्रक्चर व नेटवर्वâ में सहयोग के नतीजतन भारतीय रेलवे में स्टेशनों, ट्रैक, रोिंलग स्टॉक, सिगनल व संरक्षा प्रणालियों का उन्नयन होगा। लखनऊ ाqस्थत आरडीएसओ भारतीय रेलवे के लिए तकनीकी मानकों का निर्धारण व स्वीकृतियां प्रदान करने वाली संस्था है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह आज तक कोई नया आविष्कार करने में विफल रहा है। यही वजह है कि अनिल काकोदकर की अध्यक्षता वाली संरक्षा समिति ने इसमें आमूलचूल परिवर्तन की सिफारिश की थी। आरटीआरआइ के साथ समझौता उसी कड़ी के तहत है। इसके बाद इस संगठन से कुछ नया निकलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भारतीय स्टेशनों, टै्रक, पुल, सिगनल प्रणाली, विद्युतीकरण ,रोिंलग स्टॉक (कोच, इंजन, वैगन) का उन्नयन भी वक्त की जरूरत है। विश्र्व का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्वâ होने के बावजूद भारतीय रेल की छवि पुरातन प्रणाली की बनी हुई है। देश के विकास के साथ इसे बदलने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सैम पित्रोदा समिति ने आधुनिकीकरण संबंधी अपनी रिपोर्ट में साढ़े आठ लाख करोड़ के निवेश का खाका पेश किया था। पिछले रेल बजट में इसके लिए धन जुटाने के उपाय घोषित किए गए थे। बजटीय समर्थन भी बढ़ाया गया है। लेकिन असली चुनौती आधुनिकीकरण योजना को अमल में लाने की थी। विश्र्व में सबसे आधुनिक माना जाने वाला जापान रेलवे इसमें मदद करेगा। जापानी तकनीक के प्रयोग से रेलवे लाइनों पर प्रत्येक ३० किलोमीटर के बजाय ६० किलोमीटर पर ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत रह जाएगी।
लुधियाना व अंबाला स्टेशनों को आधुनिक बनाएगा प्रâांस
नई दिल्ली। प्रâांस पंजाब में लुधियाना व अंबाला स्टेशनों का आधुनिकीकरण करेगा। साथ ही प्रâांस दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर सेमी हाईस्पीड ट्रेन चलाएगा। सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए जापान के साथ त्रिस्तरीय ऐतिहासिक समझौते के बावजूद सिर्पâ जापान पर ही निर्भर नहीं रहना चाहती। वह कई अन्य देशों अमेरिका व चीन के साथ भी सहयोग बढ़ाना चाहती है। एक तरफ जहां अमेरिकी वंâपनी जीई के साथ मढ़ौरा डीजल लोको पैâक्ट्री के लिए समझौता हुआ है। वहीं चीन रेलवे की सियुआन सर्वे एंड डिजाइन ग्रुप वंâपनी ने दिल्ली-चेन्नई हाईस्पीड ट्रेन के पहले चरण के तहत दिल्ली से नागपुर के बीच प्लािंनग स्टडी का काम पूरा कर लिया है। दूसरी ओर प्रâांसीसी वंâपनी एल्स्टॉम को मधेपुरा इलोqक्ट्रक लोको का अनुबंध देने के बाद दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर के बीच सेमी हाईस्पीड ट्रेन चलाने के अलावा लुधियाना, अंबाला स्टेशनों के पुर्निवकास का जिम्मा सौंपा जा सकता है। दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर के बीच सेमी हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए जापान पूरा जोर लगाए हुए है। प्रâांसीसी वंâपनी सिस्त्रा पहले ही अपनी अंतरिम रिपोर्टे सौंप चुकी है। जबकि प्री-फीजिबिलिटी अध्ययन के बाद एक्जीक्यूशन स्टडी जारी है। यह भी जल्द पूरा हो जाएगा। उम्मीद है कि साल भर के भीतर इस परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर सेमी हाईस्पीड परियोजना के तहत इस रूट पर २०० किलोमीटर तक की रफ्तार वाली ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव है। इसके लिए ट्रैक व सिगनल प्रणाली के अलावा रोिंलग स्टॉक में भी सुधार किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नए रोिंलग स्टॉक का उपयोग भी संभव है जो ट्रेन सेट्स के रूप में होगा। इन ट्रेन सेट्स का शुरू में आयात होगा, जबकि बाद में ये भारत में ही बनेंगे। ईएमयू ट्रेनों की तरह ट्रेन सेट्स में अलग से इंजन लगाने की जरूरत नहीं होती। प्रत्येक कोच खुद अपने मोटर से चलता है। प्रâांस की रुचि भारतीय स्टेशनों के विकास में भी है। इसकी शुरुआत उसने लुधियाना व अंबाला स्टेशनों से करने का प्रस्ताव किया है। इन्हें प्रâांसीसी स्टेशनों की तर्ज पर विकसीत किया जाएगा।

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