प्रतीकात्मक तस्वीर
एक लोक नीति फोरम 'भारत नीति' की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में राव ने कहा, 'जब हम गायों के बारे में बात करते हैं तो इसे सांप्रदायिक करार देकर इसका राजनीतिकरण किया जाता है। आज हम एक अहम विषय 'दाल' पर चर्चा कर रहे हैं। दालें गायों की तरह नहीं होतीं और वे धर्मनिरपेक्ष होती हैं... मुझे उम्मीद है कि इसे सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाएगा।'
राव ने कहा कि देश में ज्यादातर लोग शाकाहारी हैं और उनके लिए प्रोटीन की मुख्य स्रोत दालें हैं। लिहाजा, प्रोटीन सुरक्षा और कीमतों पर लगाम सुनिश्चित करने के लिए दालों के उत्पादन में आत्म-निर्भरता की जरूरत है।
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