Wednesday, 16 December 2015

ब्याज दरें बढ़ने का असर दुनिया पर नहीं

अमरीकी सेंट्रल बैंक की इमारत.
अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी को करने का फैसला किया है, इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था से बहुत अधिक मतलब है नहीं.
दरअसल दुनिया के क़रीब सभी विकसित देशों की ब्याज दरें क़रीब शून्य पैसे हैं. ये दरें 2007-09 में आई मंदी के दौर में मांग को बढ़ाने के लिए तय की गई थीं.
अब उन्हें लगता है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था पिछली दो-तीन तिमाहियों में काफ़ी बेहतर हुई है. ऐसे में उन्हें लगता है कि ब्याज दर को शून्य के क़रीब रखने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि बाज़ार में थोड़ा अधिक पैसा पहुंच गया है और लोन बहुत बांटा गया है. ऐसी में पैसे की आपूर्ति को कम करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाया गया है. यह बढ़ोतरी बहुत छोटी सी है, इसलिए इसका बहुत अधिक असर नहीं होगा.
इस बढ़ोतरी का मुख्य असर मुद्रा विनिमय पर पड़ेगा. बाज़ार पर इसका असर पहले ही पड़ चुका है.
अमरीकी फ़ेडरल रिजर्व की अध्यक्ष ज़ेनेट येलेन.Image copyrightGETTY IMAGES
देखिए जिन संस्थागत विदेशी निवेशकों को भारत के बाज़ार से पैसा निकालना था, वो पहले ही निकाल चुके हैं, क्योंकि बाज़ार से पैसा ब्याज दरें बढ़ने के बाद नहीं निकलता है, वह ब्याज दरों पर अनुमान लगते समय ही निकल जाता है.
निवेशकों को जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है तो उन्हें लगता है कि बॉन्ड की क़ीमतें कम होंगी. इस वजह से लोग बॉन्ड नहीं ख़रीदतें हैं और वो दरें बढ़ने के बाद बॉन्ड ख़रीदतें हैं और बाद में बेचते हैं.
पिछले दो तिमामी में अमरीकी जीडीपी दो-तीन फ़ीसद बढ़ी है. यह काफ़ी नई चीज़ है, क्योंकि पिछले चार पांच साल में ऐसा नहीं हुआ था. इसे देखते हुए मुझे लगता है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में सुधार है.
ऐसे में यह कहना ज़्यादा सही होगा कि अमरीकी अर्थव्यवस्था उम्मीद के मुताबिक़ सुधर रही है.
एक अमरीकी शहर में लगा घर का  विज्ञापन.Image copyrightEPA
उल्लेखनीय है कि अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 0.25 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी करने का फ़ैसला किया है.
अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व के इस फ़ैसले से ब्याज दर 0.25 से 0.50 फ़ीसदी के बीच रहेगी.
अमरीका के सेंट्रल बैंक ने अगले साल के आर्थिक विकास दर के अनुमानों को भी 2.3 फ़ीसद से बढ़ा कर इसे 2.4 फ़ीसद कर दिया है.

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