Thursday, 3 December 2015

96 फ़ीसद से ज़्यादा मुस्लिम प्रत्याशी हारे

गुजरात, भाजपा प्रत्याशी हाजी हाशछा सैय्यदImage copyrightGirish Joshi
Image captionभाजपा प्रत्याशी हाजी हाशछा सैयद ने चुनाव जीतने के बाद कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा की.
गुजरात में भाजपा ने पहली बार 450 मुसलमानों को अपना टिकट दिया लेकिन फिर भी मुसलमानों ने उस पर भरोसा नहीं किया और पार्टी के सिर्फ़ 15 मुसलमान उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाए.
गुजरात में भाजपा के उदय के पीछे कई कारण हैं, जिसमें गुजरात भाजपा और मुसलमानों के बीच रहे संघर्षपूर्ण संबंध भी हैं. गुजरात के आम मतदाताओं के मन में छवि है कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है और भाजपा हिंदुओं की.
मोदी की गुजरात भाजपा की हार पर प्रतिक्रिया का कार्टून
साल 2002 के दंगों के बाद नरेंद्र मोदी ने भाजपा की छवि सुधारने की काफ़ी कोशिश की. साल 2010 में सद्भावना उपवास से लेकर अब तक भाजपा अपनी छवि सुधारने की कोशिश में लगी है.
स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने महानगरों से तहसील पंचायत तक 450 मुसलमान प्रत्याशियों को टिकट दिए थे. लेकिन इनमें से सिर्फ़ 15 ही चुनाव जीत पाए हैं.
अहमदाबाद महानगर में भाजपा ने चार मुसलमानों को टिकट दिया था. लेकिन मुस्लिम बहुत क्षेत्रों में चुनाव लड़ रहे इन प्रत्याशियों में एक भी नहीं जीत पाया. मतदाताओं ने या तो कांग्रेस को वोट दिया या निर्दलीय प्रत्याशी को.
gujrat_bjp_candidate_haji_hashchha_saiyyadImage copyrightAFP
सौराष्ट्र की उना नगरपालिका में भाजपा ने 20 मुसलमानों को टिकट दिया था जिनमें से 10 चुनाव जीत गए. छह महानगरों में से सिर्फ़ राजकोट में भाजपा का एक मुसलमान प्रत्याशी चुनाव जीत पाया है.
कच्छ में तहसील पंचायत के चुनाव में भाजपा के हाजी हाशछा सैयद भी चुनाव जीते. परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने कच्छ के प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा की.

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