Thursday, 3 December 2015

देश की सबसे बड़ी ई-टेलर फ्लिपकार्ट को फाइनैंशल इयर 2014-15 में करीब 2,000 करोड़ रुपये का लॉस हुआ। यह इसकी सेल्स के 20 पर्सेंट के बराबर है। कंपनी की सेल्स भले ही तेजी से बढ़ रही हो, तगड़ा डिस्काउंट ऑफर करने और बैक-एंड ऑपरेशंस पर भारी खर्च की वजह से उसे घाटा हुआ। इसके कन्जयूमर पोर्टल को चलाने वाली फ्लिपकार्ट इंटरनेट को 1,096.4 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ, जबकि होलसेल इकाई फ्लिपकार्ट इंडिया को 836.5 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास सोमवार को कराई गई फाइलिंग में इसका जिक्र किया गया। एक साल पहले दोनों यूनिट्स को मिलाकर 715 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। हालांकि, ऑनलाइन रिटेलर रेवेन्यू तेजी से बढ़ाने में सफल रही। मार्च 2015 में खत्म हुए साल के दौरान इसकी नेट सेल्स 10,390 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले का तीन गुना है। फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने कंपनी के फाइनैंशल्स पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एक्सपर्ट्स ने संकेत दिया है कि अगर मार्केट शेयर बढ़ाने के चक्कर में फ्लिपकार्ट कौड़ियों के भाव पर मर्चेंडाइजिंग बेचने के अपने मौजूदा मॉडल को जारी रखती है तो भविष्य में उसे और नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिटेल कंसल्टेंसी एलार्गिर सलूशंस की डायरेक्टर रुचि सैली ने कहा, ‘ऊंची लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और डिस्काउंट्स के चलते फ्लिपकार्ट को सेल्स का 35 से 50 फीसदी हिस्सा ऑपरेटिंग लॉस के तौर पर उठाना पड़ सकता है। लॉस कम करने का एक ही रास्ता है कि ज्यादा मार्जिन वाले अपैरल और होम प्रॉडक्ट्स कैटिगरी में खुद को डायवर्सिफाई किया जाए।’ फ्लिपकार्ट के कॉमर्स हेड मुकेश बंसल ने सितंबर में ET से कहा था कि कंपनी फिस्कल इयर 2015-16 में 10 अरब डॉलर का सामान बेचने के रास्ते पर चल रही है। फ्लिपकार्ट अपने सेलर्स की संख्या को भी मार्च तक मौजूदा 60,000 से दोगुनी करना चाहती है। इससे वह खुद को प्रतिस्पर्धी स्नैपडील की तरह शुद्ध तौर पर मार्केटप्लेस के तौर पर बदलना चाहती है। फ्लिपकार्ट आक्रामक तरीके से हायरिंग भी कर रही है। एक प्रमुख रिटेल ग्रुप के CEO ने कहा, ‘फ्लिपकार्ट का मौजूदा मॉडल आर्थिक आधार पर किसी मतलब का नहीं है क्योंकि कंपनी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट से कम रेट पर सामान बेच रही है। इस वजह से कस्टमर्स अट्रैक्ट होते हैं। फ्लिपकार्ट को ऐडवर्टाइजिंग और डेटा सेलिंग जैसे ऑल्टरनेटिव रेवेन्यू मॉडल भी देखने होंगे ताकि वह पैसा बना सके।’ जेपी मॉर्गन की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया की इंटरनेट कंपनियों को प्रॉफिटेबिलिटी के लिए चाइना की प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा कठिन और तकलीफदेह सफर से गुजरना पड़ सकता है।

kargil1 liveind241999 के करगिल युद्ध में भारत के हाथों अपने सैनिकों के हताहत होने पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों को तैनात करने और उसके संभावित इस्तेमाल की तैयारी कर रहा था। उस वक्त सीआईए ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को चेतावनी दी थी। वाइट हाउस के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को यह कहा। सीआईए ने रोजाना की गोपनीय सूचना के तहत चार जुलाई 1999 को यह जानकारी राष्ट्रपति को उस वक्त दी थी जब उनका मेहमान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने का कार्यक्रम था।
अपने सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ के दुःस्साहस के चलते वैश्विक फजीहत और आसन्न हार का सामना कर रहे शरीफ ने वॉशिंगटन की यात्रा कर युद्ध खत्म करने में क्लिंटन की मदद मांगी थी। वाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में उस वक्त रहे बुरस रीडेल ने बताया कि चार जुलाई 1999 की सुबह सीआईए ने अपने गोपनीय डेली ब्रीफ में लिखा कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की तैनाती और संभावित इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है।वह उन कुछ लोगों में शामिल थे जो क्लिंटन…शरीफ मुलाकात में मौजूद थे। सीआईए के पूर्व विशेषज्ञ रीडेल ने सेंडी बर्जर के लिए लिखे एक श्रद्धांजलि नोट में इस बात का खुलासा किया है। बर्जर का कैंसर से बुधवार को निधन हो गया। वह क्लिंटन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे थे। उन्होंने लिखा है, ‘बर्जर ने क्लिंटन अपील की थी कि वह शरीफ की बात सुनें लेकिन दृढ़ रहें। पाकिस्तान ने यह संकट शुरू किया है और इसे बगैर किसी मुआवजे के खत्म करना चाहिए। राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री (शरीफ) से यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि सिर्फ पाकिस्तान के पीछे हटने से ही आगे का तनाव दूर हो सकता है।’
रीडेल ने लिखा है, ‘शरीफ अपने सैनिकों को वापस बुलाने को राजी हो गए। इसकी कीमत उन्हें अपने पद के रूप में चुकानी पड़ी। सेना ने एक तख्तापलट में उन्हें अपदस्थ कर दिया और उन्होंने सऊदी अरब में एक साल निर्वासन में बिताया। लेकिन दक्षिण एशिया में परमाणु युद्ध का खतरा टल गया।’

No comments:

Post a Comment