अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव से मौसम संबंधी परिस्थितियां 1998 से भी ज़्यादा ख़राब हो सकती हैं.
अल नीनो वो प्राकृतिक घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का गर्म पानी उत्तर और दक्षिण अमरीका की ओर फैलता है और फिर इससे पूरी दुनिया में तापमान बढ़ता है. यह स्थिति हर दो से सात साल के अंतराल पर बनती है.
इसकी वजह से मौसम का सामान्य चक्र बिगड़ जाता है और बाढ़ और सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं.
अल नीनो का सर्वाधिक असर अफ़्रीका में होने की आशंका है, जहां अगले साल फ़रवरी में भोजन की कमी हो सकती है.
1998 में अल नीनो का सबसे बुरा प्रभाव देखा गया था और कई देशों में भीषण बाढ़ आई थी. अल नीनो से बाढ़ और सूखा जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
उपग्रह से मिली तस्वीरों से पता चल रहा है कि 1998 जैसी परिस्थितियां एक बार फिर से पैदा हो रही हैं, खासतौर से उत्तरी गोलार्द्ध में स्थिति ख़तरनाक बन सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि इस संकट का प्रभाव अभी से दिखने लगा है.
आमतौर पर सबसे ज्यादा ठंडा रहने वाले उत्तरी ध्रुव में इस मौसम में सबसे ज़्यादा ठंड रहती है, लेकिन, उत्तरी ध्रुव में अभी तापमान बढ़ा हुआ है.
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