नई दिल्ली। चीन में बनी चीजों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है भारत । मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान अब तक भारतीय आयात में चीन की हिस्सेदारी १५ फीसदी बढ़ गई है। वित्त वर्ष २०१०-११ के दौरान भारत में चीन की आयात हिस्सेदारी ११.८ फीसदी थी, जो वित्त वर्ष २०१४-१५ में बढ़कर १३.५ फीसदी हो गई। इस तेज रफ्तार के चलते अब भारत, चीन में तैयार प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है।
बाजार के कारोबारियों का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के बीच उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बरकरार है। कुल मिलाकर दोनों देश के बीच व्यापार में इजाफा हुआ है। वर्ष २०११-१२ में भारत और चीन के बीच व्यापार करीब ५७.६५ अरब डॉलर का था, जो २०१४-१५ में बढ़कर ७२.३ अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त के दौरान यह व्यापार करीब २९.२ अरब डॉलर का रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक व्यापार बढ़ने की अहम वजह चीन से भारत का बढ़ता आयात है। दोनों देशों के बीच हुए कुल व्यापार पर नजर डाले तो वर्ष २०१४-१५ के दौरान, भारत ने चीन से करीब ६०.४ अरब डॉलर का आयात किया, जबकि चीन ने भारत से महज ११.९ अरब डॉलर के माल मंगवाए।
बाजार के कारोबारियों का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के बीच उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बरकरार है। कुल मिलाकर दोनों देश के बीच व्यापार में इजाफा हुआ है। वर्ष २०११-१२ में भारत और चीन के बीच व्यापार करीब ५७.६५ अरब डॉलर का था, जो २०१४-१५ में बढ़कर ७२.३ अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त के दौरान यह व्यापार करीब २९.२ अरब डॉलर का रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक व्यापार बढ़ने की अहम वजह चीन से भारत का बढ़ता आयात है। दोनों देशों के बीच हुए कुल व्यापार पर नजर डाले तो वर्ष २०१४-१५ के दौरान, भारत ने चीन से करीब ६०.४ अरब डॉलर का आयात किया, जबकि चीन ने भारत से महज ११.९ अरब डॉलर के माल मंगवाए।
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