Wednesday, 4 November 2015

अयोध्या में नहीं पाकिस्तान में पैदा हुए थे श्रीराम, किताब का दावा

अयोध्या में नहीं पाकिस्तान में पैदा हुए थे श्रीराम, किताब का दावा

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भगवान राम अयोध्या में पैदा नहीं हुए थे, ये दावा एक किताब में किया गया है। 

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के एक व‌रिष्ठ पदाधिकारी ने अपनी किताब में दावा किया है कि रामजन्म भूमि विवाद ‌ब्रिटिश सरकार की देन है और वर्तमान दिनों में जिस अयोध्या को राम की जन्मभूमि बताया जा रहा है, राम वहां पैदा ही नहीं हुए थे। ब‌ल्‍कि वे प‌‌श्चिमोत्तर भारत या पाकिस्तान में पैदा हुए ‌थे। 
एआईएमपीएलबी के सहायक महासचिव और प्रवक्ता अब्दुल रहीम कुरैशी की किताब 'फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपिसोड (मिथ ऑफ रामज्‍न्म भूमि)' में दावा किया है कि वेदों और पुराणों में कहीं भी राम की जन्मभूमि या साम्राज्य के रूप में 'गंगा के मैदान' का जिक्र नहीं है। 
कुरैशी के मुताबिक, राम का राज्य 'सप्‍त सैंधव' वास्तव में हरियाणा या पंजाब से मौजूदा पाकिस्तान होते हुए अफगानिस्तान के पूर्वी इलाकों तक फैला था। कुरैशी ने राम के त्रेता युग में पैदा होने के दावों पर भी सवाल उठाया है। 
उल्लेखनीय है कि रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद व‌िवाद का एक पक्षकार एआईएमपीएलबी भी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय इस मामले में 2010 में फैसला सुना चुका है और फिलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
एआईएमपीएलबी कुरैशी की किताब के 'तथ्यों के प्रचार' और राम के जन्म पर 'जागरुकता' फैलाने के लिए पूरे देशों में हिंदू नेताओं के साथ बैठक करने की योजना बना रही है। 
इं‌डियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि समय की गणना की हिंदू युग पद्घति के अनुसार श्री राम 24 या 28वें त्रेतायुग में पैदा हुए थे, और हम कलियुग के 28वें चक्र में हैं, जिसका मतलब ये है कि राम तकरीबन 180 लाख साल पहले पैदा हुए थे। दुन‌िया में कहीं भी लाखों साल पुराना अवशेष या खंडहर नहीं पाया गया। कुरैशी का दावा है कि राम त्रेतायुग में पैदा ही नहीं हुए थे। 
कुरैशी ने लिखा है कि रामायण में ग्रहों और नक्षत्रों की दी गई स्थिति के आधार पर ‌विशेषज्ञों ने राम की जन्म की अवधि 5561 इसा पूर्व या 7323 इसा पूर्व मानी है। हालांकि राम की जन्मभूमि और राम से जुड़े स्‍थानों के रूप में उत्तर प्रदेश जिन इलाकों को जिक्र रामायण या अन्य क‌थाओं में हैं वहां 600 इसा पूर्व से पहले तक मनुष्य के आवास का प्रमाण ही नहीं है।
कुरैशी की किताब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अधिकारी जस्सू राम के लेखों के हवाले से दावा किया गया है कि राम वास्तव में पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान जिले में पैदा हुए थे, जिस कस्बे में राम का जन्म हुआ था उसे रहमान ढेरी के नाम से जाना जाता है। पहले इसे राम ढेरी के नाम से जाना जाता था।
एआईएमपीएलबी की योजनाओं को लेकर कुरैशी ने कहा,'अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों में टकराव बढ़ाने के लिए ये झूठी कहानी प्रचारित की कि राम मंद‌िर गिराकर मस्जिद बना दी गई।'
कुरैशी का कहना है कि राम मंदिर विध्वंस की कहानी में बाबर को जैसा बताया जाता है, वह वैसा बिलकुल नहीं था। बाबर ने अपने अंतिम आदेश में अपने बेटे हुमायूं से धार्मिक दुराग्रहों को समाप्त करने को कहा था। उसने उसे गोहत्या से दूर रहने का आदेश भी दिया था। कुरैशी ने कहा कि इस मामले में लोगों को जागरूकर बनाने के लिए एआईएमपीएलबी पूरे देश में हिंदू नेताओं के साथ बैठक करेगी। 
एआईएमपीएलबी के एक अन्य पदाधिकारी कमाल फारुकी और कुरैशी ने बताया कि राम को लेकर कई तथ्य उन्होंने कोर्ट के समक्ष भी रखे हैं। कुरैशी ने अपनी किताब ये भी बताया है कि अकबर के शासनकाल में गोस्वामी तुलसी दास ने अयोध्या में बैठकर रामचरित मानस की रचना की। मस्जिद तुलसीदास के सामने ही थी, लेकिन उन्होंने कहीं भी ये नहीं लिखा की म‌स्जिद राम मंदिर को गिराकर बनाई गई है। अगर अयोध्या वास्तव में राम की जन्‍मभूमि थी तो ये बहुत ही असामान्य था। 

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